प्राकृतिक संसाधन एवं सतत उपयोग:
भूमिका
प्राकृतिक संसाधन पृथ्वी पर जीवन के लिए अनिवार्य हैं, लेकिन इनका अति-दोहन जैव विविधता के संकट और पारिस्थितिक असंतुलन को जन्म देता है। इसलिए, प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग और प्रभावी प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।
भूमि उपयोग (Land Utilization)
भूमि संसाधन एवं इसका महत्व
भूमि पृथ्वी की सतह का वह भाग है जो विभिन्न जैविक एवं अजैविक प्रक्रियाओं से प्रभावित होता है। यह कृषि, आवास, उद्योग, वानिकी और जैव विविधता संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत में भूमि उपयोग पैटर्न
भारत में भूमि उपयोग निम्नलिखित प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है:
- कृषि भूमि – खाद्यान्न उत्पादन के लिए उपयोग की जाती है।
- वन भूमि – पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखने में सहायक।
- अभियंत्रण एवं औद्योगिक भूमि – उद्योग, खनन एवं बुनियादी ढांचे के विकास के लिए।
- पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र – राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य एवं जैव विविधता वाले क्षेत्र।
मृदा क्षरण (Soil Degradation) एवं प्रबंधन रणनीतियाँ
मृदा क्षरण भूमि की उर्वरता में कमी का परिणाम है, जो विभिन्न कारणों से हो सकता है, जैसे कि:
- अत्यधिक कृषि और रसायनों का प्रयोग
- वनों की कटाई
- अत्यधिक चराई और शहरीकरण
- जल और वायु अपरदन
मृदा क्षरण प्रबंधन रणनीतियाँ
- मृदा संरक्षण तकनीकें – जैसे कंटूर जुताई, टेरेसिंग, मल्चिंग।
- जैविक खेती – प्राकृतिक खाद एवं जैविक उर्वरकों का प्रयोग।
- पुनर्स्थापन कार्यक्रम – वृक्षारोपण एवं वनीकरण।
- जल संरक्षण तकनीकें – जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन, वर्षा जल संचयन।
अपक्षय भूमि का पुनर्स्थापन (Restoration of Degraded Lands)
मृदा और भूमि की उत्पादकता को पुनः प्राप्त करने के लिए विभिन्न तकनीकों का प्रयोग किया जाता है, जिनमें निम्नलिखित प्रमुख हैं:
- वृक्षारोपण एवं पुनर्वनीकरण
- स्थानीय पौधों का पुनरुत्थान
- समेकित खेती (Integrated Farming)
- जैव प्रौद्योगिकी द्वारा मृदा गुणवत्ता सुधार
जल, आर्द्रभूमि (Wetlands): खतरे एवं प्रबंधन रणनीतियाँ
जल संसाधन
जल सभी जीवों के लिए एक मूलभूत संसाधन है। जल संकट और प्रदूषण के बढ़ते खतरे जल संरक्षण को अनिवार्य बनाते हैं।
आर्द्रभूमि एवं इनका महत्व
आर्द्रभूमियां (Wetlands) जैव विविधता के हॉटस्पॉट माने जाते हैं और जल शुद्धिकरण, कार्बन भंडारण और मत्स्य पालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आर्द्रभूमि के लिए खतरे
- शहरीकरण और औद्योगिकीकरण
- अति दोहन और भूमि परिवर्तन
- जलवायु परिवर्तन और बढ़ता प्रदूषण
प्रबंधन रणनीतियाँ
- जल पुनर्चक्रण एवं अपशिष्ट जल उपचार
- आर्द्रभूमि संरक्षण अधिनियमों का पालन
- स्थानीय समुदायों की भागीदारी
- रामसर संधि (Ramsar Convention) के दिशा-निर्देशों का पालन
भारत में प्रमुख रामसर स्थल
- चिल्का झील (ओडिशा)
- केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान)
- वुलर झील (जम्मू और कश्मीर)
- लोकटक झील (मणिपुर)
वन एवं उनके उत्पाद
वनों का महत्व
वन कार्बन संतुलन बनाए रखते हैं, जैव विविधता के संरक्षण में सहायक होते हैं और कई प्रमुख एवं गौण वन उत्पादों का स्रोत होते हैं।
मुख्य वन उत्पाद
- लकड़ी, गोंद, रेजिन, टैनिन, इंधन लकड़ी
- औषधीय पौधे एवं वनस्पति तेल
वन क्षरण (Deforestation) एवं जैविक आक्रमण (Biological Invasion)
- वनों की कटाई – कृषि, शहरीकरण, अवैध कटाई।
- पर्यावरणीय असंतुलन – जैव विविधता हानि, जलवायु परिवर्तन।
- विदेशी प्रजातियों का आक्रमण – स्थायी वन्य प्रजातियों को नुकसान।
वन संरक्षण के उपाय
- समेकित वन प्रबंधन
- सामुदायिक वानिकी कार्यक्रम
- वृक्षारोपण एवं पुनर्वनीकरण
ऊर्जा संसाधन: अक्षय एवं अनवीकरणीय स्रोत
अक्षय ऊर्जा स्रोत
- सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जलविद्युत, जैव ईंधन
- लाभ – पर्यावरण के अनुकूल, स्थायी।
अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत
- कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस
- नुकसान – सीमित भंडार, प्रदूषण का कारण।
आधुनिक संसाधन प्रबंधन तकनीकें
- पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) – किसी भी परियोजना का पर्यावरण पर प्रभाव जानने की प्रक्रिया।
- भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) – संसाधनों की मैपिंग एवं प्रबंधन।
- सहभागी संसाधन मूल्यांकन (Participatory Resource Appraisal – PRA) – स्थानीय समुदायों की सहभागिता।
- पारिस्थितिक पदचिह्न (Ecological Footprint) और कार्बन पदचिह्न (Carbon Footprint) – संसाधनों के उपयोग का आकलन।
- संसाधन लेखांकन (Resource Accounting) – आर्थिक एवं पारिस्थितिक लेखांकन।
निष्कर्ष
प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग एवं संरक्षण न केवल पारिस्थितिकी संतुलन के लिए आवश्यक है बल्कि मानव अस्तित्व के लिए भी महत्वपूर्ण है। वनस्पति विज्ञान के छात्रों को प्राकृतिक संसाधनों के जटिल अंतर्संबंधों, पारिस्थितिकी तंत्र की क्रियाओं, तथा संरक्षण रणनीतियों की समझ विकसित करनी चाहिए। सतत संसाधन प्रबंधन का कुशल उपयोग पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करेगा एवं जैव विविधता को संरक्षित करेगा।